दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना- DAYA KAR DAAN VIDYA KA

 दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना- DAYA KAR DAAN VIDYA KA





दया कर दान विद्या का,

हमें परमात्मा देना,

दया करना हमारी आत्मा में,

शुद्धता देना ।


हमारे ध्यान में आओ,

प्रभु आँखों में बस जाओ,

अँधेरे दिल में आकर के,

प्रभु ज्योति जगा देना ।


बहा दो प्रेम* की गंगा,

दिलों में प्रेम का सागर,

हमें आपस में मिल-जुल के,

प्रभु रहना सीखा देना ।


हमारा धर्म हो सेवा,

हमारा कर्म हो सेवा,

सदा ईमान हो सेवा,

व सेवक जन बना देना ।


वतन के वास्ते जीना,

वतन के वास्ते मरना,

वतन पर जाँ फिदा करना,

प्रभु हमको सीखा देना ।


दया कर दान विद्या का,

हमें परमात्मा देना,

दया करना हमारी आत्मा में,

शुद्धता देना ।


*प्रेम: कुछ लोग "प्रेम" की जगह "ज्ञान" शब्द को प्रयोग में लाते हैं.

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